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Showing posts from May, 2017

Nirbhay Raj Mishra

Nirbhay Raj Mishra

जिन्दगी में ऐसे मौके रोज नही आते हैं हम ऐसे लोग नहीं रिश्ते तोड़ जाते हैं कभी न कभी तो तुम कहीं पे मिलोगे ही जिन्दगी में ऐसे यार छूट नहीं जाते हैं

Nirbhay Raj Mishra

बहुत खोया बहुत रोया किसी का ही नहीं पाया सभी उन्माद में रहते मगर मैं सो नही पाया अजब सी उलझने हैं अब भी जब साथ में हो तुम नफरत जिससे करता था उसे मैं खो नहीं पाया 

मन की हार

                    मन की हार ये मैं चंचल है बहुत बड़ा , पर समक्ष सभी के यही खड़ा मन को वश में जो कर जाये , जीवन में वो कुछ कर जाये मन पर जिसका अधिकार हुआ , भव सागर वो पार हुआ मैं इसका एक शिकार हुआ , एक बार नहीं दो बार हुआ एक बार मैं फिर से हार गया .......... समझा जिसको अपनी मंजिल , वो निकला न कोई शाहिल वो निकली एक ऐसी धार , जिससे हुआ मैं तार तार जान के उसको जान ना पाए , समझा तो समाधान ना आया लिख डाली एक पाती तब , पर मैंने ये सोचा था कब वो मेरे लिए एक रार हुआ एक बार मैं फिर से हार गया ......... दो साल हुए थे इसको , पर मैं समझा ना पाया उसको फिर एक दिन ऐसा आया , कालेज में विज्ञान समाया वह नयी कुछ बात हुई , अन्दर अन्दर कुछ बात हुई आखों ने फिर प्रलय किया , नयनों का अश्रु से मिलन हुआ फिर आगे से एक वार हुआ एक बार मैं फिर से हार गया ............. गलती थी मेरी मैं शांत रहा, प्रमाण जो उनके हाथ हुआ वो प्रमाण मेरी पाती थी , जो केवल स्वार्थ दिखाती थी फिर अश्रुओं की जलधार बही माना मैंने की...