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Showing posts from 2018

Nirbhay Raj Mishra

Nirbhay Raj Mishra

Nirbhay Raj Mishra

Pathar ke sanam full song lyrics

                     पत्थर के सनम............. पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमने ये क्या समझा ये क्या जाना पत्थर के सनम .................. चेहरा तेरा दिल में लिए चलते रहे अंगारों पे, तू हो कहीं, तू हो कहीं सजदे किए हमने तेरे रुखसारों पे, हम सा ना हो कोई दीवाना....... पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना पत्थर के सनम .................. सोचा था ये बढ जाएगी तनहाइयाँ जब रातों की, रस्ता हमें,रस्ता हमें दिखलाएगी शम-ए-वफ़ा उन हाथों की ठोकर लगी........ तब पहचाना........ पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना पत्थर के सनम .................. ऐ काश की होती खबर तूने किसे ठुकराया है शीशा नहीं,सागर नही मंदिर सा एक दिल द्वारा है का आसमां........... है विराना......... पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमने ये क्या समझा ये क्या जाना पत्थर के सनम ........

मुक्तक

जिसे खोने से डरा उसे खो दिया | जब खुद को तन्हा पाया रो लिया | हदें पार कर दी जब उस जिंदगी ने, मौत के अंजुमन में मैं चल दिया |                                                                                                                             -निर्भय राज मिश्रा

मुक्तक

बहुत हँस जिया हूँ, इस जिंदगी में तेरे सवालों से रो ना दू | मत पूछ मुझसे यूं हर बात की वजह, डरता हूँ बता तुझे खो ना दूँ |                                                                                                       -निर्भय राज मिश्रा

मुक्तक

तुझमें मैं, मुझमें तू खोना चाहे | जिंदगी यूं सरल होना चाहे | तू रहे संग में, उम्र भर बस यूं ही, मैं तेरी शायरी, तू गज़ल होना चाहे |                                                         -निर्भय राज मिश्रा 

Happy Father's Day by Nirbhay Raj Mishra

आए वो पल आपके

करीब मेरे मगर खुद के आस पास हो तुम लहकती बुझती हुई आग की उजास हो तुम | चहकते गाते परिंदे की ख़ामोशी हो तुम खिली सुबह की तरह – शाम की उदासी हो तुम | हजार चुप से घिरी हलचलों के   घेरे में रुकी रुकी सी हिचकती सी कोई सांस हो तुम | कभी निगाह की हद में कभी हद से बाहर हो कभी यकीन में ढलती कभी कयाश हो तुम | बने नही की टूट जाये एक बुत जैसे इतनी आम इतनी आम इतनी खास हो तुम | तेरी नींद की जरूरत मेरे ख्वाब का बहाना मेरा धीमे धीमे चलना तेरा हौले हौले आना | मासूम हसरतों क आये में पल रहा है तेरा लहर-सा मचलना मेरा तट-सा थरथराना | ये तुम्हारी मुस्कराहट अभी दिल में घुल रही है जरा देर यूं   ही रहना जरा थम के मुस्कराना | ये किसी की आरजू है, जो भटक रही है गुमसुम अभी बेखुदी में है, वो आवाज़ मत लगाना | कहीं धूप के उजाले कहीं शाम की स्याही कभी सुर्ख शोख सुबहें कभी शाम कातिलाना | आबाद होगी इनसे तनहाइयों की दुनिया ये गजल है, मुकम्मिल इसे त्तुम भी गुनगुनाना |

1921 Full Song sun Le Zara

Nirbhay Raj Mishrs

Nirbhay Raj Mishra

Nirbhay Raj Mishra

Chand mera naraj hai full song lyrics in hindi by Nirbhay Raj Mishra

चाँद मेरा नाराज़ है, ना बात करे ना मिलता है कैसे उसको समझाऊ, ना समझे रिश्ता दिल का है हफ़्तों से कितने उसने ना बात की, मुझको पता भी नहीं, किस बात की नाराज़गी चाँद मेरा नाराज़ है ना बात करे ना मिलता है कैसे उसको समझाऊ, ना समझे रिश्ता दिल का है भीड़ है इतनी दुनिया में पर कोई ना अपना दिखता है, लोग हैं पागल क्या समझें जो, तेरा मेरा रिश्ता है तुझको भी तो हैं न मोहब्बत, फिर क्यों दूरी रखता है ना शब् में ना सुबह में, ना शाम ढले वो मिलता है कैसे उसको समझाऊ, ना समझे रिश्ता दिल का है  रस्में ऐसी दुनिया की हैं, जिनसे दिल ये डरता है दिल बेबस है मिलना चाहे ये रोता है तड़पता है दिल मर सकता है तो तेरे बिन, पर अब जी नहीं सकता है तेरे बिन बीते जो पल, हर पल लगता मुश्किल सा है मुझको बात पता है ये में समझूं रिश्ता दिल का है, हफ़्तों से कितने उसने ना बात की, मुझको पता भी नहीं, किस बात की नाराज़गी चाँद मेरा नाराज़ है ना बात करे ना मिलता है कैसे उसको समझाऊ, ना समझे रिश्ता दिल का है